परिचय: समुदाय -आधारित वन प्रौद्योगिकियां
ध्यान से देखिए-सुनिए कि अब वन डिजिटल तकनीकों के एकत्रित होने के केंद्र बनते जा रहे हैं। ड्रोन वृक्षों की छतरी के ऊपर मंडराते हैं, उपग्रह पेड़ों की छाया की धुंधली छवियाँ भेजते हैं, रोबोट रोपण के नियमों के तहत धरती को जोतते हैं, सेंसर वनों के अंतर्नाद को सुनते हैं, कैमरा ट्रैप किसी जीव की चमकती आँखें दर्ज करते हैं और रात के अंधेरे में देह की गर्मी को पहचानते हैं।
‘स्मार्ट’ वन तकनीकें अब तेजी से फैल रही हैं जो जलवायु तकनीक, प्रकृति तकनीक और डिजिटल पारिस्थितिक तंत्रों के व्यापक संदर्भ में उभर रही हैं। फिर भी, ‘स्मार्ट सिटी’ जैसे शब्द आम हो चुके हैं जिनमें डिजिटल समाधान पारंपरिक शहरी सेवाओं को बेहतर बनाते हैं या उन्हें प्रतिस्थापित करते हैं । वहीं ‘स्मार्ट वन’ की अवधारणा अभी आकार ले रही है।
नीति, उद्योग, सार्वजनिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में ‘स्मार्ट’ और ‘वन’ जैसे शब्द तरल, बहुआयामी और बहुस्तरीय हैं । हमारे शोध में हमने इन शब्दों को उनके प्रयोग और सक्रिय होने वाले व्यवहारों के आधार पर समझा, न कि किसी एक परिभाषा तक सीमित किया। ‘स्मार्ट वन’ से हमारा तात्पर्य उन विविध डिजिटल तकनीकों और ढाँचों से है जो अब वनों का प्रबंधन, निगरानी, नेटवर्किंग और पुनर्निर्माण कर रहे हैं । वनों को संसाधनों के लिए अनुकूलित करने, पर्यावरणीय बदलाव का पता लगाने, और वन हानि की स्थिति में हस्तक्षेप करने के प्रयासों में निमग्न है ।
स्मार्ट वन दुनिया भर में पाए जा सकते हैं चाहे दूरस्थ क्षेत्र हों या शहरी स्थान। लेकिन इनकी बढ़ती उपस्थिति के बावजूद इन तकनीकों के सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है। पर्यावरणीय क्षेत्रों में ये तकनीकें तटस्थ नहीं हैं बल्कि इनके गहरे सामाजिक-राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं । हमारे प्रमुख प्रश्न इन प्रभावों पर केंद्रित हैं:
- स्मार्ट वन तकनीकें पर्यावरणीय निगरानी, प्रबंधन और शासन प्रक्रियाओं को कैसे बदल रही हैं?
- वन आधारित जीवन, संरक्षण, पुनरुत्थान और मनोरंजन से जुड़े समुदायों पर इन स्मार्ट वन तकनीकों का सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव क्या पड़ रहा है?
- समुदाय-आधारित वन तकनीकों के ज़रिए अधिक न्यायसंगत वन संबंधों और प्रथाओं को कैसे विकसित और बनाए रखा जा सकता है?
हमारे शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि स्मार्ट वन तकनीकें स्थानीय समुदायों की आपसी गतिशीलता,मिलनसारिता, वन के साथ उनके संबंधों, उत्साह,लगाव, आजीविकाओं और राज्य व उद्योगों से उनके संबंधों को कैसे प्रभावित कर रही हैं।
‘स्मार्ट’ और ‘वन’ जैसे शब्दों की तरह हम समुदाय को भी व्यापक रूप में समझते हैं। समुदाय स्थानीय और भौगोलिक रूप से सीमित हो सकते हैं, लेकिन वे डिजिटल, भौगोलिक रूप से बिखरे हुए और आत्म-निर्धारित भी हो सकते हैं। वे शासन के विभिन्न स्तरों को पार कर सकते हैं या मनुष्यों के अतिरिक्त जीवों को भी शामिल कर सकते हैं। कुछ समुदाय भागीदारीपूर्ण परियोजनाओं से बनते हैं या किसी तकनीक को लागू करने के उद्देश्य से बनते हैं। वे क्षणिक, प्रासंगिक या स्थायी हो सकते हैं।
यह अंतरिम रिपोर्ट समुदायों, जनता, नीति-निर्माताओं, उद्योगों और एनजीओ को इन सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना चाहती है क्योंकि वे सभी इन तकनीकों के उपयोगकर्ता, नियामक, निवेशक और विकासकर्ता हैं। इस रिपोर्ट में हम यह दर्शाते हैं कि कैसे वन डिजिटल वातावरण बनते जा रहे हैं, और कैसे विविध समुदाय इन तकनीकों के साथ जुड़ रहे हैं और इनसे प्रभावित हो रहे हैं। हम यह भी मानते हैं कि डिजिटल तकनीकें केवल एक प्रकार की तकनीक हैं जो वनों में प्रयुक्त हो सकती हैं — पारंपरिक, एनालॉग और पारिस्थितिक तकनीकें भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती हैं। यह रिपोर्ट चिली, भारत, इंडोनेशिया और नीदरलैंड में चार केस स्टडी स्थलों पर स्मार्ट वन तकनीकों की तैनाती का दस्तावेज और विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसे अंतरिम रूप में प्रकाशित किया जा रहा है ताकि समुदायों, नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के बीच संवाद उत्पन्न हो जो इस रिपोर्ट के अंतिम संस्करण को आकार देने में सहायक होगा। अंतिम संस्करण में ब्रिटेन में समुदाय-नेतृत्व वाली तकनीकों और भू-दृश्य पुनरुत्थान पर हमारी पाँचवीं केस स्टडी भी शामिल की जाएगी।
पिछले दो दशकों में वन प्रबंधन और बड़े पैमाने पर पुनर्वनीकरण के माध्यम से पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नीति हस्तक्षेपों में वृद्धि हुई है। जैव विविधता, जल, वायु और कार्बन चक्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वन अब पर्यावरणीय कार्रवाई के प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि इस अवधि में कई लक्ष्य पूरे नहीं हो सके जैसे कि वैश्विक स्तर पर किसी भी आइची लक्ष्य (2011-2020) की पूर्ण प्राप्ति नहीं हुई और न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन ऑन फॉरेस्ट्स (2014) के प्रारंभिक लक्ष्यों को भी हासिल नहीं किया जा सका ,फिर भी अंतरराष्ट्रीय नीतियाँ और प्रतिज्ञाएँ जारी हैं। 2019 में संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन दशक के हिस्से के रूप में 35 करोड़ हेक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि को पुनर्स्थापित करने का प्रस्ताव आया और 2021 में ग्लासगो डिक्लेरेशन ऑन फॉरेस्ट्स (COP26) में 2030 तक अवैध वनों की कटाई को रोकने के लिए समझौते शामिल किए गए जिससे न्यूयॉर्क घोषणा को बल मिला।
ऐसे पर्यावरणीय लक्ष्यों की पूर्ति और वैधता के लिए अब सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों द्वारा वनों की निगरानी और प्रबंधन हेतु डिजिटल तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। तकनीकी कंपनियाँ और शोधकर्ता पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए डिजिटल तकनीकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जैसे AI for Earth के माध्यम से रिमोट-सेंसिंग और डेटा संग्रह या सेंसर आधारित ‘इंटरनेट ऑफ ट्रीज़’ की पहल। डिजिटल तकनीकों से लॉगिंग गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सकती है, संसाधनों का कुशल उपयोग किया जा सकता है, शहरी वन नेटवर्क का मानचित्रण किया जा सकता है, कार्बन कैप्चर की निगरानी की जा सकती है, और वनों के स्वास्थ्य तथा रोगों का आकलन किया जा सकता है। ‘फॉरेस्ट डिजिटल ट्विन्स’ यानी वास्तविक वनों की वर्चुअल प्रतिकृतियाँ तैयार की जा रही हैं, ताकि संरचना में संभावित बदलावों की भविष्यवाणी की जा सके और भविष्य के परिदृश्यों को मॉडल किया जा सके। दुनिया भर में बढ़ती वनाग्नियों के कारण वायरलेस सेंसर नेटवर्क, ड्रोन और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का प्रयोग वास्तविक समय में आग को पहचानने और बुझाने के लिए किया जा रहा है।
हमारा उद्देश्य इस शोध में न तो केवल स्मार्ट वनों की वकालत करना है और न ही केवल आलोचना करना। बल्कि हम यह दर्शाना चाहते हैं कि स्मार्ट वन कैसे अधिक या कम रहने योग्य दुनिया का निर्माण कर रहे हैं और किन तरीकों से ? इस रिपोर्ट का प्रमुख उद्देश्य यह दस्तावेज़ीकरण करना और ऐसी रणनीतियाँ प्रस्तुत करना है, जिनसे समुदाय-नेतृत्व वाले वन तकनीकी प्रयासों को प्रभावी ढंग से डिज़ाइन, लागू और समर्थित किया जा सके। आगे के अनुभागों में हम अपने प्रमुख प्रश्नों और निष्कर्षों को उजागर करते हैं, समानांतर शोध और नीतियों के संदर्भ में अपने योगदान को रखते हैं और फिर भारत, चिली, इंडोनेशिया और नीदरलैंड की चार केस स्टडी कहानियों के माध्यम से अपने शोध को प्रस्तुत करते हैं। इन समुदायों, निवासियों और श्रमिकों के साथ संवाद के आधार पर हम यह बताते हैं कि वन तकनीकों के सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों को कैसे संबोधित किया जा सकता है और कैसे समुदाय इन तकनीकों के साथ मिलकर जीवंत और न्यायसंगत वन पारिस्थितिक तंत्र बना सकते हैं ।
स्मार्ट फॉरेस्ट्स की फिल्म में बोस्के पेहुएन संरक्षण क्षेत्र में कैमरा ट्रैप दिखाया गया है। अराउकेनिया, चिली. स्मार्ट वनों के साथ फिल्म पर ध्यान दें, 2025.
स्मार्ट फॉरेस्ट्स फिल्म में इकोडोर्प बोएकेल इकोविलेज को दिखाया गया है। नीदरलैंड। स्मार्ट वनों के साथ फिल्म पर ध्यान दें, 2025.