हम क्या पढ़ते हैं: समुदाय, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण
इस रिपोर्ट को तैयार करते समय, हमने समुदाय-आधारित स्मार्ट फॉरेस्ट से जुड़ी नीतियों और ग्रे साहित्य (अप्रकाशित या सीमित रूप से वितरित जानकारी) का विश्लेषण किया, जो हमारे अकादमिक साहित्य की चल रही समीक्षा का पूरक रहा। हमने चालीस से अधिक नीति और ग्रे साहित्य के दस्तावेज़ों की समीक्षा की, जिनमें पर्यावरण, सामाजिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी से संबंधित विविध विषय शामिल थे। ये दस्तावेज़ समुदायों या फंडिंग एजेंसियों के लिए बनाए गए आसान टूलकिट से लेकर नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के लिए तैयार किए गए अत्यधिक तकनीकी लेखों तक फैले हुए थे। हमारे खोज शब्दों में शामिल थे: स्मार्ट फॉरेस्ट, समुदाय, कार्बन, स्मार्ट कृषि, पृथ्वी अवलोकन, डिजिटल फॉरेस्ट, जंगल की आग, जैव विविधता और पर्यावरण निगरानी। यह महत्वपूर्ण है कि यह समीक्षा ग्रे साहित्य के केवल एक चयनित हिस्से को दर्शाती है और इसे पूरी तरह से समग्र नहीं माना जा सकता।
इन प्रकाशनों ने विशेष रूप से यह सुझाव देकर उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान की कि कैसे विभिन्न समुदायों को तकनीकों या उनके स्थानीय पर्यावरण के साथ समान रूप से जोड़ा जा सकता है। इन सिद्धांतों ने हमारे समुदाय-नेतृत्व वाले वन प्रौद्योगिकी पर अनुसंधान को आकार देने और रिपोर्ट के अंत में प्रस्तुत नीति विचारों को निर्देशित किया।
हम ग्रे साहित्य की रचनात्मक डिजाइन और सामग्री से भी प्रेरित हुए। उदाहरण के लिए कुछ प्रकाशन समुदायों को अपने मानचित्रण टूल का उपयोग करने और उन्हें ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर साझा करने के लिए आमंत्रित करते हैं या फिर दृश्य और श्रव्य मीडिया को पाठ के साथ संवाद में रखते हैं (जैसे ODI की रिपोर्ट पॉवर, इकोलॉजी और डिप्लोमेसी इन क्रिटिकल डाटा इंफ्रास्ट्रॅक्चर )। हमने अपने पाठकों को आकर्षित करने और सोच की नई दिशाओं को प्रोत्साहित करने की आशा से अपनी रिपोर्ट में इन रचनात्मक अभ्यासों को अपनाया है।
ग्रे साहित्य में तीन प्रमुख विषय उभरे:
- डिजिटल प्रौद्योगिकियों के सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव
- समुदायों की पर्यावरण के साथ भागीदारिता
- प्रौद्योगिकियां और पर्यावरण
हालाँकि इन क्षेत्रों के दस्तावेज़ों में स्पष्ट निष्कर्ष दिए गए, लेकिन कुछ ही दस्तावेज़ थे जो इन तीनों विषयों को एक साथ संबोधित करते हैं। जिनमें ऐसा किया गया, वे या तो किसी एक स्थान पर केंद्रित थे (जैसे GSM एसोसिएशन का केन्या में सह-डिज़ाइन पर आधारित पेपर ‘मोबाइल टेक्नोलॉजी फॉर पर्टिसिपेटरी फॉरेस्ट मैनेजमेंट’) या फिर केवल समुदायों के लिए व्यावहारिक उपयोग हेतु तैयार किए गए थे (जैसे ‘रैनफॉरेस्ट टेक प्राइमर्’ जिसे ‘द इंजिन रूम’ और ‘रैनफॉरेस्ट फाउंडेशन नॉर्वे’ ने तैयार किया)।
इस रिपोर्ट का उद्देश्य इन तीनों विषयों: वन पर्यावरण, समुदायों और प्रौद्योगिकियों के सामाजिक-राजनीतिक प्रभावको जो ड़ना है। यह केवल एक स्थान पर केंद्रित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों से अंतर्दृष्टियों को संकलित करता है और इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों, नीति निर्माताओं, गैर-सरकारी संगठनों, उद्योग विशेषज्ञों, फंडिंग एजेंसियों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं और आम जनता सहित व्यापक दर्शकों तक पहुंचना है।
डिजिटल प्रौद्योगिकियों के सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव
हमारी ग्रे साहित्य समीक्षा में कई लेख डिजिटल प्रौद्योगिकियों के वितरण और उपयोग की समानता पर केंद्रित थे। उदाहरण के लिए ‘प्रोमिसिंग ट्रबल’ नामक सामाजिक उद्यम की रिपोर्ट ‘एफोरडेबल, एक्सेसेबल, इसी टू यूस’ डिजिटल पहुंच को स्वास्थ्य का एक “सुपर-सामाजिक निर्धारक” मानती है। यह रिपोर्ट आर्थिक बाधाओं को हटाने और समावेशी-डिज़ाइन का एक मानक अपनाने का प्रस्ताव रखती है, जिसमें गैर-डिजिटल विकल्प भी शामिल हों।
कुछ रिपोर्टें डिजिटल तकनीकों के उन लोगों के लिए उपलब्धता की चुनौतियों पर भी ध्यान देती हैं जो निरक्षर हैं (जैसे ‘मेप्पिंग फॉर राइटस्’)। जहां अधिकतर दस्तावेज़ डिजिटल समावेशन और बहिष्करण जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, वहीं हमने डिजिटल प्रौद्योगिकी का वितरण और पहुंच जैसी अधिक समावेशी और बहुविध अवधारणा को अपनाया है, जिससे तकनीकी जुड़ाव की विविध संभावनाओं को समझा जा सके।
तकनीक के समुदायों के साथ सह-निर्माण पर भी कई रिपोर्टें केंद्रित थीं। इसमें समुदायों के साथ मिलकर विकसित की गई तकनीकों को अधिक प्रभावी, समावेशी और स्थायी माना गया। डाटा एंड सोसाइटी की रिपोर्ट डेमोक्रेटाइज़िंग एआई जैसे दस्तावेज़ों ने इसे लागू करने के व्यावहारिक सुझाव दिए। हालांकि AI के लोकतांत्रीकरण को लेकर कुछ आलोचनाएं भी थीं कि यह तकनीक महंगी, ऊर्जा-गहन और तकनीकी रूप से जटिल है, जिससे यह सभी के लिए सुलभ नहीं हो सकती।
इस खंड में कुछ रिपोर्टें डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे फाइबर-ऑप्टिक केबल, सैटलाइट और डेटा सेंटर्स के सामाजिक-राजनीतिक जोखिमों पर भी केंद्रित थीं। जैसे ODI ने दिखाया कि इंटरनेट की भौतिक अवसंरचना जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक शक्तियों की दृष्टि से कितनी संवेदनशील है।
यह साहित्य डिजिटल ढांचे के सामाजिक-राजनीतिक निहितार्थों को उजागर करता है और दिखाता है कि कैसे समुदायों को स्मार्ट फॉरेस्ट तकनीकों के सह-निर्माण में बेहतर ढंग से शामिल किया जा सकता है।
पर्यावरण से समुदाय की भागीदारी
समीक्षा के दौरान कई दस्तावेज़ समुदायों की पर्यावरणीय भागीदारी को बढ़ाने पर केंद्रित थे जैसे भूमि संरक्षण, सामाजिक रूप से न्यायसंगत भूमि उपयोग, बदलाव और पर्यावरणीय मुद्दों पर जन-संवाद।
इनमें से कई दस्तावेज़ मार्गदर्शिकाएं या टूलकिट के रूप में थे और सीधे समुदायों के लिए लिखे गए थे। उदाहरण के लिए, कम्युनिटी सेंटिनल्स की मेथडोलॉजी गाइड फॉर कम्युनिटी पार्टिसिपेटरी मॉनिटरिंग को चित्रों और रचनात्मक पृष्ठों के साथ इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वह विविध समुदायों को आकर्षित कर सके। यह निगरानी को सामूहिक देखभाल का कार्य बताती है, जिसमें समुदाय अपने इंद्रियों के माध्यम से जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय जोखिम और सांस्कृतिक परिदृश्य से जुड़ते हैं।
कुछ रिपोर्टों ने नीति निर्माताओं और संगठनों को सुझाव दिए कि वे समुदायों के साथ सार्थक जुड़ाव कैसे बनाएं। इनमें शामिल थे भरोसेमंद संदेशों को समर्थन देना, दीर्घकालिक साझेदारी बनाना, शक्ति और संसाधनों का स्थानीय वितरण और समन्वित शासन व्यवस्था बनाना। कुछ रिपोर्टें कल्पनाशील निर्णय निर्माण विधियों की वकालत करती हैं जैसे मॉरल इमेजिनिंग जो निर्णय प्रक्रिया में प्रकृति, भविष्य की पीढ़ियों और पूर्वजों को शामिल करने की बात करती है । वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया की रिपोर्ट सोशली जस्ट लैंडस्केप रेस्टोरेशन इन द स्कॉटिश हाइलैंड्ससामाजिक न्याय को केंद्र में रखकर भूमि पुनरुद्धार की वकालत करती है।
यह साहित्य समुदायों की आवाज़ को प्राथमिकता देने के व्यावहारिक और रचनात्मक तरीकों को उजागर करता है और यह समझने में मदद करता है कि पर्यावरणीय परियोजनाएं स्थानीय समुदायों की आजीविका, स्वास्थ्य और भलाई पर कैसे असर डाल सकती हैं।
प्रौद्योगिकियां और पर्यावरण
इस खंड में हमने तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर केंद्रित दस्तावेज़ पढ़े, खासकर वनों को लेकर। इनमें जलवायु-स्मार्ट वानिकी और कृषि, वन अग्नि प्रबंधन हेतु रिमोट सेंसिंग और जलवायु परिवर्तन के लिए अनुकूलन और न्यूनीकरण तकनीकों पर ध्यान दिया गया।
कई दस्तावेज़ तकनीकी रूप से अत्यधिक जटिल थे और मुख्य रूप से नीति निर्माताओं, विधायकों और शोधकर्ताओं के लिए तैयार किए गए थे। उदाहरण के लिए FAO, ILO और UNECE द्वारा लिखी गई रिपोर्ट ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ इन द फ्यूचर ऑफ फॉरेस्ट्री वर्क दिखाती है कि कैसे नई तकनीकों, जलवायु परिवर्तन और जनसांख्यिकी परिवर्तनों के कारण वानिकी क्षेत्र में कार्य की प्रकृति बदल रही है। यह रिपोर्टें बताती हैं कि रोबोटिक्स, थकान पहचान प्रणाली और रिमोट सेंसर जैसी तकनीकें एक ओर जहां नौकरियों को प्रभावित कर सकती हैं, वहीं दूसरी ओर कार्य सुरक्षा में सुधार भी ला सकती हैं।
हालांकि, इन दस्तावेज़ों की तकनीकी भाषा और जटिलता यह संकेत देती है कि कई स्मार्ट फॉरेस्ट तकनीक के विकासकर्ता और नियामक शायद समुदायों या जनता को अपनी योजनाओं में शामिल नहीं कर रहे हैं।
हमारा योगदान
जहां प्रौद्योगिकियों के सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव, समुदाय की भागीदारिता और तकनीकी पर्यावरणीय नवाचारों पर काफी ग्रे साहित्य मौजूद है, वहीं तीनों विषयों को एक साथ जोड़ने वाले दस्तावेज़ बहुत ही कम हैं। हमारी स्मार्ट फोरेस्ट्स रिपोर्ट इस अंतर को भरने का प्रयास करती है। यह रिपोर्ट यह दिखाने के लिए तैयार की गई है कि कैसे समुदाय की भागीदारिता और नेतृत्व स्मार्ट फॉरेस्ट तकनीकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हमारा उद्देश्य है कि यह रिपोर्ट विभिन्न दर्शकों स्थानीय समुदायों, नीति निर्माताओं, एन.जी.ओ., उद्योग, तकनीकी और अनुसंधान फंडिंग संस्थाओं, पत्रकारों, शिक्षाविदों और आम जनता के लिए उपयोगी होऔर वन प्रबंधन के क्षेत्र में नई साझेदारियों और संवाद की प्रेरणा बने।
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